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लोक तंत्र भ्रम जाल बना है

लोक-तन्त्र भ्रम-जाल बना है
गला घोटता काल बना है ।
माल काटती राजनीति है
जनता खातिर साल बना है ।।

खद्दरधारी सब पर भारी
जनता वाहन बने सवारी ।
गठबन्धन इनका कितनो से
फीता-शाही धन्धा-धारी ।।

अरबों की सम्पत्ति सजाते
धर्म -जाति का गीत सुनाते ।
लाशो पर यह ओट खरीदे
खून सने विस्तर पर सोते ।।

डा दीनानाथ मिश्र

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1 Comments

बहुत खूब

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